जो घट घट रंग बदलते हैं.. By Vinay Kumar Pandey

चापलूसी जिनकी प्रवृत्ति है,
जो औरों के गलत प्रचार करते हैं,
‘काबिल’ का मतलब उन्हें पता नहीं,
उनके प्रतिभा का निर्धारण करते हैं
ऐसे सज्जनों से फिर क्या ताल्लुक
जो पल पल व्यवहार बदलते हैं
जो घट घट रंग बदलते हैं…

©️ विनय कुमार पाण्डेय

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4 thoughts on “जो घट घट रंग बदलते हैं.. By Vinay Kumar Pandey”

  1. बहुत ही सुंदर कविता, विनय। हम ऐसे लोगो को नजरंदाज करने के सिवा और कुछ नही कर सकते है।। Keep writing and inspiring!🌈🌻

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