निगाहें👀

दिल के विराने में ,तुम कहीं दुपक कर बैठे हो,
जैसे किसी बच्चे ने , देख लिया किसी हैवान को।
ना कुछ बोलते हो,ना कुछ सुनते हो,
बस अपने ही धुन में बढ़े जाते हो।।
अपने निगाहें ज़रा इस तरफ भी कर दो,
क्या पता कब ये ज़िन्दगी अथुरी छूट जाए तुम्हारी यादों में।

This poem is inspired

By-Mustaf Zahid(Film-awarapan)

Author: dakshali27

A women who's still searching her wisdom via art.

Leave a Reply