मध्यम परिवार के लड़के

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Vinay kumar pandey

Read next Hindi Poem from our regular visitor Vinay Kumar Pandey. He is my junior at my college.

आशाओं से लदा हुआ,
पोटली लिए उम्मीदों की,
संघर्षों की अल्पता के लिए,
उन्हें अक्सर निकलना पड़ता है,
बेहतर जीवन की आशा में
उन्हें देर रातों को जागना पड़ता है

झेलते हुए उपहासों को,
जटिल परेशानियों की बहावों से
खुद को बचाते, सम्भालते,
अपने जेबों को टटोलते,
एक सहारे की तलाश में उन्हें
छोड़ना पड़ता है अपना घर

अपने ख़्वाहिशों से परे,
अपनों के सपनों के लिए,
मध्यम परिवार के हर लड़कों को
छोड़ना पड़ता है अपना घर
सयानेपन की पगड़ी पहने उन्हें,
काटना पड़ता है ऐसा सफर

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Thank you Vinay for sharing your poem with us!🙏🏻

Author: dakshali27

A women who's still searching her wisdom via art.

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