शिकायते🍁

ज़िन्दगी के इस सफ़र में ,कभी रोया ना था ।

ना जाने कैसे सीखा मैंने रोना ।

सबकी ज़िन्दगी इतनी खूशनसीब कहां!

सुनना चाहें, हर घड़ी।

आजमाया मैंने भी ये माया,

कोई फिर कभी ना आया।

ज़िन्दगी हसीन है मेरे दोस्त,

रोने रुलाने की क्या जरूरत।

बस तू जी ले अपनी ज़िन्दगी,

ना जाने कब, मिले नसीब।

© दक्षाली 🌸

रोना - शिकायते

Author: dakshali27

A women who's still searching her wisdom via art.

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