मध्यम परिवार के लड़के

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Vinay kumar pandey

Read next Hindi Poem from our regular visitor Vinay Kumar Pandey. He is my junior at my college.

आशाओं से लदा हुआ,
पोटली लिए उम्मीदों की,
संघर्षों की अल्पता के लिए,
उन्हें अक्सर निकलना पड़ता है,
बेहतर जीवन की आशा में
उन्हें देर रातों को जागना पड़ता है

झेलते हुए उपहासों को,
जटिल परेशानियों की बहावों से
खुद को बचाते, सम्भालते,
अपने जेबों को टटोलते,
एक सहारे की तलाश में उन्हें
छोड़ना पड़ता है अपना घर

अपने ख़्वाहिशों से परे,
अपनों के सपनों के लिए,
मध्यम परिवार के हर लड़कों को
छोड़ना पड़ता है अपना घर
सयानेपन की पगड़ी पहने उन्हें,
काटना पड़ता है ऐसा सफर

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कितना मुश्किल है कुछ कहना …

Vinay kumar pandey

कितना मुश्किल है कुछ कहना
कुछ बातें किसी को बता देना
और उनका समझ जाना
सम्भवतः ऐसा कभी होता नहीं

चुप रहते तो भी सही था
पर अक्सर वे अर्थ बदल लेते हैं
इसीलिए सामंजस्य नहीं बन पाता
फिर भी लोग दूसरों से कह लेते हैं…

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Read latest poem “वो इश्क़ है …. ” by Vinay Kumar Pandey.

अतीत के वो पल by Vinay Kr. Pandey

Vinay kumar pandey

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अधिकांश के …
उनके सबसे खुशमय पल
अपनों के साथ बिताए,
उनके अतीत होते हैं..

ऐसे लोगों का ‘आज’,
उन्ही अपनों के साथ
उनके अतीत से खुशमय नहीं होता…

क्योंकि…. वक्त के साथ
अपनों ने अपने व्यवहार बदल लिए हैं
इसलिए बीतें सुखद उन पलों की
फिर कभी पुनरावृत्ति नहीं होती…

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