मध्यम परिवार के लड़के

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Vinay kumar pandey

Read next Hindi Poem from our regular visitor Vinay Kumar Pandey. He is my junior at my college.

आशाओं से लदा हुआ,
पोटली लिए उम्मीदों की,
संघर्षों की अल्पता के लिए,
उन्हें अक्सर निकलना पड़ता है,
बेहतर जीवन की आशा में
उन्हें देर रातों को जागना पड़ता है

झेलते हुए उपहासों को,
जटिल परेशानियों की बहावों से
खुद को बचाते, सम्भालते,
अपने जेबों को टटोलते,
एक सहारे की तलाश में उन्हें
छोड़ना पड़ता है अपना घर

अपने ख़्वाहिशों से परे,
अपनों के सपनों के लिए,
मध्यम परिवार के हर लड़कों को
छोड़ना पड़ता है अपना घर
सयानेपन की पगड़ी पहने उन्हें,
काटना पड़ता है ऐसा सफर

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Thank you Vinay for sharing your poem with us!🙏🏻

~पायल~

आज पता नही क्यूं खुश होने का मन सा कर रहा है,
आज पता नहीं क्यूं खुश होने का मन सा कर रहा है।

बीते दर्द भरे दिनों को भुलाने का मन सा कर रहा है,
बीते दर्द भरे रातों को भुलाने का मन सा कर रहा है।

आज पता नही क्यूं खुश होने का मन सा कर रहा है।

मन कर रहा है, हवाओं में उड़ने का, बादलों में तैरने का
पंछियों के साथ गुफ्तगू करने का;

क्युकी इंसानों से तो बात करना बंद ही हो गई है,
बची कुची उम्मीद कोरोना ने खत्म कर दी है।।

फिर भी, अजी पता नही क्यों खुश होने का मन सा कर रहा है।

मन कर रहा हैं,
वादियों में चिल्लाने का, जहां मेरी चीख कोई न सुन सके।
इस जुलाई की बारिश में भीगने का, जहां मेरे आसू कोई न देख सके।
बारिश के बाद, उन पत्तों की ओस से प्यास बुझाने का मन सा कर रहा है।।

आज पता नही क्यूं खुश होने का मन सा कर रहा हैं,
बीते दर्द भरे रातों को भुलाने का मन सा कर रहा है।

किसी अनजान बच्चों से हटखेलिया करने  का सा मन कर रहा है,
उन्हें तंग, चिढ़ाने का मन सा कर है,
उन्हें ममता देने का मन सा कर रहा है।

क्या ये एहसास, पायल की संपर्क से उत्तेजीत हुई हैं?
क्या ये उसकी घुंगरू की झंकार की खुशी है?
जिससे मैने बीते दिनों, पहनना ही शुरू किया था।

आज पता नही क्यूं खुश होने का मन सा कर रहा है,
इस खुशी में भी उसको ढूंढने का मन सा कर रहा है!!!


GHUNGROO CHIMES

I feel like being happy today,
I don’t know, why I feel like being happy today.

forgetting the past painful days and nights.

I want to fly in the wind, dance in the crusted clouds, chatter with the  cheerpy birds.

As conversation with human has abrupted and those hope left by, Corona ended.

Still, I feel like being happy today,
forgetting the past painful days and nights.

A desire came within a soul,
To shout from the highest plain, where no one can hear my scarry scream.

A desire came within a soul,
To get drenched in the rain of this July, where no one can see my fallin tears.

I feel like quenching my thirst with the dew of those leaves that arise due to after shower.

I don’t know why I feel like being happy,
Feeling like forgetting the past painful days and nights.

Is this feeling triggered by Payal’s contact?
Is this the joy of his Ghungroo chimes?
Which I have started wearing in the past.

I don’t know why I feel like being happy today.
Even in this happiness,
his dreadful thoughts  still knocking its way.

P.S : I tried to translate into English, but the originality of the actual poem can't compare with that. But, I tried for all my others followers who can't understand hindi.

Also, my comment is now working according to the team ✨ Do let me know, if it's working or not !!

Thank you :)) I hope you enjoyed it.

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कितना मुश्किल है कुछ कहना …

Vinay kumar pandey

कितना मुश्किल है कुछ कहना
कुछ बातें किसी को बता देना
और उनका समझ जाना
सम्भवतः ऐसा कभी होता नहीं

चुप रहते तो भी सही था
पर अक्सर वे अर्थ बदल लेते हैं
इसीलिए सामंजस्य नहीं बन पाता
फिर भी लोग दूसरों से कह लेते हैं…

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Read latest poem “वो इश्क़ है …. ” by Vinay Kumar Pandey.