Throwback !

अफसानों की इस दुनिया में
महज़ एक बिंदु बन कर रह गए हो।
बिंदु भी ऐसा ना दिखते हो,
ना महसूस होते हो,
ना सुनाई देते हो और ना ही कुछ बोलते हो,
बस छोड़ दी एक छाप बिंदु जैसी।

अफसानों की इस दुनिया में,
महज़ तुम एक बिंदु बन कर रह गए हो।
बिंदु भी ऐसा, जिसे ना मिटाया जा सकता है,
और ना ही भुलाया जा सकता है ।।

अफसानों की इस दुनिया में, महज़ तुम एक बिंदु बन कर रह गए हो।।

©Dakshali Gupta

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Author: dakshali27

A women who's still searching her wisdom via art.

0 thoughts on “Throwback !”

    1. धन्यवाद दोस्त ।
      एवं शुक्रिया !😊 मेरे दूसरे पोस्ट को पसंद करने के लिए !

    1. हा, जितना लिखो उतना कम ही है।
      इसलिए ये जीवन है, जिनमें अनेक रस छुपे हुए है !

  1. लफ्ज़ और अफसाने उतरते हुए होंठो से ठिठकता है जरा सा उस बिंदु पर । रोचक और बेहतरीन काव्य,,।🌻🌻

    1. बहुत बहुत धन्यवाद तारा ।
      आप भी वैसे एक अच्छी लेखिका है, मुझे आप से बहुत कुछ सीखना है अभी !

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